Dhanteras

पांच दिनों तक चलने वाले दीपों के त्‍योहार दिवाली की शुरुआत धनतेरस से होती है। कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस पर्व (Dhanteras Festival) मनाया जाता है। इसके बाद रूप चौदस या नरक चतुर्दशी और फिर दिवाली का त्‍योहार आता है। दिवाली के अगले दिन अन्‍नकूट और गोवर्द्धन पूजा और फिर भाईदूज का त्‍योहार आता है। दोस्तो आज इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि धनतेरस का क्‍या महत्‍व है और इसे क्‍यों मनाया जाता है।

Dhanteras 2021 : क्‍यों मनाया जाता है धनतेरस (Dhanteras Festival) का त्‍योहार।

दोस्तो Dhanteras का त्योहार मनाने के पीछे दो कथाएं प्रचलित है। दोनों इस पोस्ट में आपको बतायेंगे।

पहली कथा : आप सभी जानते ही होंगे कि धनतेरस का पर्व धन और आरोग्य से जुड़ा हुआ है। धन के लिए इस दिन कुबेर की पूजा की जाती है और आरोग्य के लिए धनवन्तरि देव की पूजा की जाती है। धनवंतरी के उत्पन्न होने के दो दिनों बाद देवी लक्ष्मी प्रकट हुई। इसलिए दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।Dhanteras

हमारे शास्त्रों में बताये अनुसार धनतेरस पर्व के दिन ही भगवान धनवंतरी अपने हाथों में स्वर्ण कलश लेकर सागर मंथन करते समय सागर से उत्पन्न हुए थे। भगवान धनवंतरी के कलश में भरे हुए अमृत को पीकर ही सभी देवता अमर हो गए थे।

शास्त्रों के अनुसार माने तो भगवान धनवंतरी देवताओं के वैद्य हैं। इनकी भक्ति और पूजा से आरोग्य सुख यानी स्वास्थ्य लाभ मिलता है। मान्यता है कि भगवान धनवंतरी विष्णु के अंशावतार हैं। इस संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने धनवंतरी का अवतार लिया था।  जैसा कि हमने पहले बताया था कि Dhanteras मनाने दो कथा प्रचलित है। तो दूसरी अब यहां पढ़ें।

Dhanteras 2023 : क्‍यों मनाया जाता है धनतेरस (Dhanteras Festival) का त्‍योहार।

दूसरी कथा : Dhanteras से जुड़ी एक दूसरी कथा है जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था तब दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने देवताओं के कार्य मे बाधा डालने का कार्य किया था। जिसके फलस्वरूप भगवान विष्णु ने असुरों के गुरू शुक्राचार्य की एक आंख फोड़ दी थी। कथा के अनुसार, देवताओं को राजा बलि के भय से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंच गये।

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यज्ञ स्थल पर भगवान वामन ने अपने एक पैर से संपूर्ण पृथ्वी को नाप लिया और दूसरे पग से अंतरिक्ष को। तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं होने पर बलि ने अपना सिर वामन भगवान के चरणों में रख दिया। बलि दान में अपना सब कुछ गंवा बैठा। इस तरह बलि के भय से देवताओं को मुक्ति मिली और बलि ने जो धन-संपत्ति देवताओं से छीन ली थी उससे कई गुणा धन-संपत्ति देवताओं को वापस मिल गयी। कहते है कि इस उपलक्ष्य में भी Dhanteras का त्योहार मनाया जाता है।

धनतेरस (Dhanteras Festival) के त्‍योहार पौराणिक महत्व क्या है?

Dhanteras के पर्व को (Dhanteras Ka Mahatva) हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। Dhanteras के दिन से ही भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा शुरू हो जाती है। यह पूजा दीवाली के त्योहार तक चलती है। कुछ मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर्व (Dhanteras) के दिन नई चीजें जैसे सोना, चांदी, पीतल और धातुओं के बर्तन आदि खरीद कर घर लाने से उन्नति के सभी रास्ते अपने आप खुल जाते हैं।

पौरणिक ग्रंथो के अनुसार धनवंतरी जिस समय समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे उस समय उनके हाथ में पीतल का अमृत कलश था। इसलिए Dhanteras के दिन पीतल के बर्तन भी खरीदे जाते हैं। आपको बता दें कि भारत देश मे धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

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