Tuesday, January 31, 2023
HomeNewsDiwali से पहले छोटी दीवाली क्यो मनाई जाती है?

Diwali से पहले छोटी दीवाली क्यो मनाई जाती है?

Choti Diwali – Chhoti Diwali 2023, Chhoti Diwali in India

दोस्तो Diwali पर्व के एक दिन पहले ओर धनतेरस के एक दिन बाद छोटी दीवाली मनाई जाती है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि आखिर छोटी दीवाली क्यों मानते है ओर इसके पीछे क्या कारण है। कोई नही अगर आपको नही पता तो इस पोस्ट में हम आपको बतायेंगे इसके पीछे की सम्पूर्ण कहानी।

सबसे पहले आपको बता दे कि छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है।अब नरक चतुर्दशी क्यो कहते है इसके पीछे भी एक कहानी है।

एक पौराणिक मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति मृत्यु के देवता यमराज और माता लक्ष्मी को प्रसन्न कर लेता है उसे मरने के बाद नरक में स्थान नहीं मिलता है। कहा तो ये भी जाता है कि अनजाने में हुए पापों से भी मुक्ति मिल जाती है।

Diwali 2021 : Diwali से पहले छोटी दीवाली क्यो मनाई जाती है?

इसको मनाने के पीछे भी पौराण‍िक  मान्यता है। मान्‍यताओं के अनुसार प्रागज्योतिषपुर राज्य में नरकासुर नाम का एक राक्षस था। उसने इंद्र को युद्ध में परास्त करके देवी मां की कान की बालियों को छीन लिया था।deepawali

यही नहीं उसने देवताओं और ऋषियों की 16 हजार कन्याओं का अपहरण करके उनको अपने स्त्रीगृह में बंदी बनाकर रखा था। स्त्रियों के प्रति नरकासुर के द्वेष को देख कर, सत्यभामा ने कृष्ण से यह निवेदन किया कि उन्हें नरकासुर का वध करने का अवसर प्रदान किया जाए।

क्‍यों मनाया जाता है धनतेरस का त्‍योहार, जानें इसका पौराणिक महत्व

उधर नरकासुर को यह शाप था क‍ि उसकी मृत्यु एक स्त्री के हाथ ही होगी। सत्यभामा कृष्ण द्वारा चलाये जा रहे रथ में बैठकर युद्ध करने के लिए गयी। उस युद्ध में सत्यभामा ने नरकासुर को परास्त करके उसका वध किया और सभी कन्याओं को छुड़वा लिया।

इसील‍िए इस दिन को नरक चतुर्दशी भी कहते है। छोटी दिवाली भी इसी दिन मनाई जाती है। इसका कारण यह है क‍ि नरकासुर की माता भूदेवी ने यह घोषणा की थी क‍ि उसके पुत्र की मृत्यु के दिन को मातम के तौर पर नहीं बल्कि त्यौहार के तौर पर याद रखा जाए।

Diwali 2021 दिवाली का पर्व 2021 में कब है जानें डेट और लक्ष्मी पूजा का टाइम, आरती के साथ

दोस्तो शास्त्रों में कहा गया है कि नरक चतुर्दशी कलयुग में मानव योनि में उत्पन्न हुए लोगों के लिए बहुत उपयोगी है। कलयुगी मानव न जानते हुए भी अनेकों प्रकार के पाप कर लेता है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि कलयुगी जीव इस दिन के नियमों और महत्व को समझें और करें।

इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तेल लगाएं। स्नान करने के बाद विष्णु मंदिर या कृष्ण मंदिर में भगवान का दर्शन अवश्य करना चाहिए। इससे पाप कटता है और रूप सौन्दर्य की प्राप्ति होती है।

Follow on youtube and watch video

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments