Tuesday, January 31, 2023
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Tajmahal का सम्पूर्ण इतिहास : Complete History of Tajmahal

ताजमहल पर निबंध : Tajmahal का सम्पूर्ण इतिहास : Complete History of Tajmahal

Taj mahal मुग़ल बादशाह शाहजहां की तीसरी बेगम मुमताज महल की मज़ार है। मुमताज के गुज़र जाने के बाद उनकी याद में शाहजहां ने यह ताजमहल बनवाया था। कहा जाता है कि मुमताज़ महल ने मरते वक्त मकबरा बनाए जाने की ख्वाहिश जताई थी जसके बाद शाहजहां ने यह ताजमहन बनावाया।

पुरे ताजमहल को सफेद संगमरमर के पत्थर से बनवाया गया है। ताजमहल के चार कोनों में चार मीनारे हैं। शाहजहां ने इस ऐतिहासिक ईमारत को बनवाने के लिए बगदाद और तुर्की से कारीगर बुलवाए थे।

इस पोस्ट में दोस्तों आपको इसी ताजमहल के सम्पूर्ण इतिहास को बताने जा रहे है। उम्मीद है हमारी ये छोटी सी कोशिश आपको पसंद आयेगी।

ताज महल कहाँ मौजूद है (Where is Taj Mahal located)

स्थापत्य कला की जीती-जागती यह ईमारत आगरा शहर में यमुना नदी के किनारे स्थित है। आगरा शहर देश की राजधानी दिल्ली से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

यह राज्य की राजधानी लखनऊ के 378 किलोमीटर पश्चिम में है,राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से 206 किमी दक्षिण में, मथुरा से 58 किलोमीटर दक्षिण और ग्वालियर से 125 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। आगरा उत्तर प्रदेश के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में से एक है और भारत में 24 वां सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है।

कौन थी मुमताज महल ? (Who was Mumtaz Mahal?)

मुमताज महल, अप्रैल 1593 में उत्तरप्रदेश के आगरा शहर में अर्जुमंद बानो बेगम के रुप में जन्मीं थी। मुमताज महल, अब्दुल हसन आसफ खां की पुत्री थी, जो कि मुगल साम्राज्य के चौथे शासक और शाहजहां के पिता जहांगीर के वजीर थे।

मुमताज महस उर्फ अर्जुमंद बानो एक बेहद सुंदर और गुणवती महिला थीं, जो कि हरम से जुड़े हुए मीना बाजार में कांच और रेशम के मोती बेचा करती थीं।

वहीं 1607 में उनकी मुलाकात इसी बाजार में मुगल वंश के शहजादे शाहजहां (खुर्रम) से हुई थी, उस समय वे महज 14 साल की थी। वहीं से शाहजहां और मुमताज महल की बेमिसाल प्रेम कहानी की शुरुआत हुई।

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समय के साथ-साथ दोनों का प्यार परवान चढ़ा और फिर इसके 5 साल बाद मुमताज महल और मुगल वंश के शहजादे शाहजहां ने 1612 ईसवी में निकाह कर लिया।

मुमताज महल ने कुल 14 बच्चों को जन्म दिया था, जिनमें से 8 पुत्र और 6 पुत्रियां थी। मुमताज महल ने अपनी 14वीं संतान गौहर बेगम के जन्म के समय अत्याधिक प्रसव पीड़ा के दौरान 17 जून, 1631 में दम तोड़ दिया था।

वहीं मुमताज की मौत के बाद शाहजहां ने अपनी मोहब्त को हमेशा अमर रखने के लिए उनकी याद में आगरा में ताजमहल बनवाया। जो कि अपनी भव्यता और अत्याधिक खूबसूरती की वजह से आज दुनिया के सात अजूबों में से एक है। इसके निर्माण में करीब 23 साल लगे थे।

ताजमहल का निर्माण कब हुआ और बनने की कहानी  (When was the Taj Mahal built and the story of its construction)

इसका निर्माण 1631 में शुरू हुआ था जो 1653 में पूरा हुआ। इसे बनाने के लिए बीस हज़ार मज़दूरों ने काम किया, जिनमें भारत के अलावा फ़ारस और तुर्की के मज़दूर भी थे। मोहब्‍बत की निशानी ‘ताजमहल’ का निर्माण 22 हजार लोगों ने 22 साल में किया था।

इस दौरान एक हजार से अधिक हाथी दिन-रात बिल्डिंग मटीरियल्‍स की ढुलाई करते थे। निर्माण में 18 तरह के कीमती पत्‍थरों का उपयोग हुआ है। तभी तो इसकी खूबसूरती 366 साल बाद भी जस की तस बनी हुई है और इसके दीदार के बाद जुबां पर पहला शब्‍द आता है- ‘वाह ताज’।

ताजमहल की संरचना (Structure of Taj Mahal)

  • Taj mahal मुग़ल वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इसकी वास्तु शैली फ़ारसी, तुर्क, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला के घटकों का अनोखा सम्मिलन है।
  • ताजमहल परसिया राजवंश की कला तथा कई मुग़ल भवन जैसे गुर-ए-आमिर, हुमायूँ का मकबरा, इतमादूद – दौलाह का मकबरा और शाहजहाँ की दिल्ली की जामा मस्जिद जैसे भवनों की निर्माण कला पर आधारित है।
  • मुग़ल शासन काल के दौरान लगभग सभी भवन के निर्माण में लाल पत्थरों का उपयोग किया गया। जैसे दिल्ली का लालकिला, आगरा का किला, हुमायूँ का मकबरा आदि परंतु ताजमहल के निर्माण के लिए शाहजहाँ ने सफ़ेद संगमरमर को चुना।
  • साथ में इन सफ़ेद संगमरमर के पथ्थरों पर कई प्रकार की नक्काशी तथा हीरे जड़ कर ताजमहल की दीवारों को सजाया गया।

ताजमहल की विशेषताएं (Features of Taj Mahal)

  • Taj mahal का निर्माण 20 हजार मजदूरों और कारीगरों ने 20 वर्ष में पूरा किया था। इसकी निर्माण सामग्री को निर्माण स्थल तक पहुँचाने के लिए मजदूरों के अलावा 1000 हाथियों का इस्तेमाल किया गया था।
  • ताजमहल में लगे बेशकीमती रत्न तथा सामग्री भारत के भिन्न भिन्न स्थानों के अलावा चीन, तिब्बत, श्रीलंका और अरब से लाए गए थे।
  • Tajmahal सफेद संगमरमर के पथ्थरों से बना है। कहा जाता है कि ताजमहल संगमरमर में तराशी हुई एक कविता है।
    इसका 30 फुट ऊँचा मुख्य द्वार लाल रंग के सैंडस्टोन से बना है। रास्ते के दोनों ओर 300 मीटर लम्बे और 300 मीटर चौड़े बगीचे हैं।
  • ताज के मुख्य गुम्बद की ऊँचाई 187 फीट है। ताजमहल एक मकबरा है जिसमें शाहजहाँ और उनकी बेगम मुमताज महल दफन हैं।
  • असली कब्रें भूमिगत बनी है। कब्र के ऊपर एक लैम्प हमेशा जलता रहता है।
  • कुरान शरीफ की आयतें खूबसूरत लिखावट में लिखी हुई हैं। इसे आगरे के लाल किले से देखा जा सकता है।
  • ताजमहल के मुख्य मकबरे के निर्माण में 12 सालो का समय लगा तथा परिसर में बनी अन्य इमारतों के निर्माण में 10 सालो का समय लगा।
  • Taj Mahal, भारत के आगरा शहर में स्थित एक विश्व धरोहर मक़बरा है। इतिहास के अनुसार इसका निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने, अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में करवाया था।
ताजमहल का इतिहास
  • ताजमहल को बनाने में 22 वर्ष का समय लगा था। इस को बनाने का काम 1632 में शुरू हुआ था जो 1653 में ख़त्म हुआ।
  • कहा जाता है कि ताजमहल को बनाने में लगभग 22000 मजदूरों का हाथ था। ऐसा भी कहा जाता है, कि शाहजहाँ ने उन कारीगरों के अंगच्छेदन आदि करा दिये थे, या मरवा दिया था, जिन्होंने ताजमहल का निर्माण कराया था। परंतु इसके पूर्ण साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।
  • ताजमहल आगरा नगर के दक्षिण छोर पर एक छोटे भूमि पठार पर बनाया गया था। इतिहासकारों के अनुसार शाहजहाँ ने इसके बदले जयपुर के महाराजा जयसिंह को आगरा शहर के मध्य एक वृहत महल दिया था।
  • ताजमहल के निर्माण की अनुमानित कीमत में भी भिन्नताएं हैं, फिर भी कुल मूल्य लगभग 3 अरब 20 करोड़ रुपए, उस समयानुसार आंका गया है, जो कि वर्तमान में खरबों रुपयों से भी अधिक हो सकता है।

आगरा ताजमहल के कुछ प्रचलित किस्से (some popular stories of agra Taj mahal)

दुनिया के सात अजूबों में शुमार खूबसूरत ताजमहल के साथ हजार किस्से जुड़े हैं। कुछ सच्चे हैं, तो कुछ झूठे भी। इतिहासकार राज किशोर राजे ने इन किस्सों पर लंबा अध्ययन किया है।

एक किस्सा यह है कि ताजमहल बन जाने के बाद शाहजहां ने इसे बनाने वाले 20 हजार मजदूरों के हाथ कटवा दिए थे। इसलिए की वे दोबारा से दूसरे ताजमहल न निर्माण ना कर सके। अब इस किस्से में कितनी सच्चाई है इसके कोई सबूत आज तक नहीं मिले है।

हाथ कटवाने के पीछे ये भी कहा जाता है कि शाहजहां ने कारीगरों से आजीवन काम न करने का वादा लिया था। इसके बदले उनको जिंदगी भर वेतन देने का वादा किया था।

कारीगरों को हाथ

कारीगरों को हाथों से हुनर का काम करने से रोक देने को ही दूसरे शब्दों में हाथ कटना कहा गया। मजदूरों के लिए अलग बस्ती बनाई गई। उनके वंशज आज भी ताजगंज में रहते हैं।

किस्से कहानियों में काला ताजमहल भी नवाने के बारे में कहा जाता है लेकिन हकीकत में इसके सुबूत नहीं मिल है। काळा ताजमहल की जो अफवाह है वो आयी एक पेंटिंग से जो ताज की मस्जिद की आर्च पर बनी है। इसमें दो ताज हैं,एक सफेद और दूसरा काला। फ्रेंच यात्री टवर्नियर ने काले ताज की कहानी सबसे पहले पेश की।

धीरे धीरे लोगो में ये धरना बन गई की शाहजहाँ ने काले ताज का निर्माण भी शुरू करवाया था। काळा ताजमहल की इस अफवाह को वर्ष 1871 में कलाईल ने इसे प्रचारित किया। 1910 से गाइडों ने कहानी को हकीकत बताकर सैलानियों को सुनाना शुरु कर दिया।

इतिहासकार राजे कहते हैं कि शाहजहांकालीन किसी पुस्तक में काले ताज का जिक्र नहीं है। यह कोरी कहानी है, जिसके साक्ष्य नहीं। एएसआई की खोदाई में साफ हो चुका है कि जिसे काला ताज की नींव बताया गया, वह मेहताब बाग का ही हिस्सा है।

ताजमहल पर सोने का कलस (Golden pot on the Taj Mahal)

  • ताज महल के निर्माण के समय बादशाह शाहजहां ने इसके शिखर पर सोने का कलश लगवाया था।
  • इसकी लंबाई 30 फीट 6 इंच लंबी थी। कलश में 40 हजार तोला यानि 466 किलोग्राम सोना लगा था।
  • इतिहासकार राजकिशोर राजे बताते हैं
  • कि ताज महल का कलश तीन बार बदला गया।
  • आगरा के किले को साल 1803 में हथियाने के बाद से ही अंग्रेजों की नजर ताज महल पर थी।
  • साल 1810 में अंग्रेजी सेना के अफसर जोसेफ टेलर ने ताज महल के शिखर पर लगा सोने का कलश उतरवा दिया।
  • उसकी जगह वैसा ही दिखने वाला सोने की पालिश किया हुआ तांबे का कलश वहां लगवा दिया था।
  • अगर स्‍वर्ण कलश आज भी वहां लगा होता तो
  • उसकी कीमत 137 करोड़ रुपए होती।
  • इसके बाद साल 1876 और फिर 1940 में ताज महल के कलश बदले गए।
  • मौजूदा कलश कांसे का है।
  • इतिहासकार राजकिशोर राजे ने लिखा है
  • कि मेहमानखाने के सामने फर्श पर बनी कलश की अनुकृति साल 1888 में नाथूराम नाम के कलाकार ने बनाई थी।
  • ताज महल के निर्माण के समय बादशाह शाहजहां ने
  • खासतौर पर लाहौर के निवासी काजिम खान को आगरा बुलाया था।
  • उन्होंने ही सोने का कलश तैयार किया था।
  • इस कलश पर चंद्रमा बना है।

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