Thursday, February 9, 2023
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Republic Day 26 January 2023: पहला गणतंत्र दिवस कब और कहां मनाया गया था?

Republic Day 26 January 2023: गणतंत्र दिवस के दिन यानि की 26 जनवरी के दिनहमारे देश में सविंधान लागु हुआ था। 26 जनवरी 1950 के दिन सविंधान भारत में लागु किया गया था। उस दिन उस दिन से लेकर आज तक हमारे देश में प्रत्येक 26 जनवरी को पुरे भारतवर्ष में गणतंत्र दिवस (Republic Day) बढे उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है। गणतंत्र दिवस बहुत खास इसलिए भी होता है क्योंकि इस दिन हरेक स्कूल सरकारी संस्थाओं में प्रोग्राम और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। 

Republic Day 26 January 2023
Republic Day 26 January 2023

Republic Day 26 January 2023: 26 जनवरी 1950 को क्या हुआ था?

26 जनवरी 1950 के दिन भारत का सविंधान लागु किया गया था। 1950 में देश में पहला गणतंत्र दिवस मनाया गया था। इसी दिन भारत में पहली बार गणतंत्र दिवस (Republic Day) की परेड का भी आयोजन किया गया था। ये परेड ब्रिटिश स्टेडियम में की गई थी। उस ज़माने में दिल्ली के पुराने किले के पास ब्रिटिश स्टेडियम हुआ करता था तो उसी स्टेडियम में भारत की पहली गणतंत्र दिवस (Republic Day) समारोह का आयोजन और परेड दोनों हुई थी।

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26 जनवरी 1950 के दिन भारत की पहली परेड में ध्वज फहराने का काम उस समय भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था। भारत का पहला गणतंत्र 1950 में हुआ था और इस मौके पर भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी वहां पर मौजूद थे।

26 जनवरी को संविधान का प्रारंभ क्यों हुआ था?

भारत में 26 जनवरी 1950 के दिन ही सविंधान क्यों लागु किया गया इस बारे में अक्सर लोगों के मन में सवाल पैदा होते रहते हैं। आपको बता दें की जब हमारे देश को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली तो उसके बाद 26 जनवरी 1949 के दिन इसे सविंधान सभा के समक्ष पेश किया गया था। सविंधान सभा में सभी लोकतांत्रिक प्रणालीयों को 26 जनवरी 1950 के दिन सविंधान को देश में लागु किया गया था।

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26 जनवरी 1950 को सविंधान लागु करने का यह भी था की साल 1930 में 26 जनवरी दिन ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने देश में आजादी की घोषणा कर दी थी। 26 जनवरी 1930 के दिन अंग्रेजी हुकूमत ने भारत को डोमिनियन स्टेट दिया था। इसलिए 26 जनवरी 1930 के दिन को महत्व देने और इसको यादगार बनाने के लिए साल 1950 में 26 जनवरी के दिन सविंधान को भारत में लागु किया गया।

गणतंत्र दिवस से क्या तात्पर्य है?

भारत देश ने अपना पहला गणतंत्र दिवस (First Republic Day) 26 जनवरी 1950 को मनाया था क्योंकि 26 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागु किया गया था। गणतंत्र दिवस से तात्पर्य है की जनता का शासन यानि की एक ऐसा तंत्र या एक ऐसी व्यवस्था जो जनता द्वारा जनता के हितों में कार्य करे। यहां गण से तात्पर्य जनता से है और तंत्र मतलब शासन। यानि की जनता का शासन।

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गणतंत्र का मतलब अब शासन पूरी तरह से जनता के हाथ में होता है। इससे पहले सारी शक्तियां किसी एक राजा या किसी एक व्यक्ति के हाथ में होती थी और जनता केवल एक प्रजा होकर उसके आदेशों का पालन करती थी। राजा जो फैसला लेता था उसको जनता को मानना होता था। लेकिन गणतंत्र में जनता द्वारा जनता का शासन होता है।

पहला गणतंत्र दिवस कब और कहां मनाया गया था?

देश का पहला गणतंत्र दिवस (First Republic Day) 26 जनवरी 1950 के दिन मनाया गया था। देश के पहले गणतंत्र दिवस का आयोजन दिल्ली के पुराने किले के समीप ब्रिटिश स्टेडियम में किया गया था। इस मौके पर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी मौजूद थे। इस मौके पर देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ध्वजारोहण किया था और तब से लेकर आज तक भारत देश हर बार गणतंत्र दिवस को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

गणतंत्र दिवस पर भाषण कौन देता है?

26 जनवरी यानी की गणतंत्र दीवान पर देश के देश के मंत्रियों, नेताओं और अफसरों द्वारा भाषण दिया जाता है और अपने देश के गौरवमई इतिहास के के बारे में बताया जाता है। हालांकि देश की राजधानी दिल्ली में ध्वजारोहण भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। और फिर महामहिम राष्ट्रपति द्वारा पुरे देश को सम्बोधित किया जाता है। इस मौके पर देश के सभी वरिष्ठ नागरिक मौजूद होते है।

संविधान किसने बनाया था ? – Who made the constitution?

भारत का संविधान 300 लोगों की एक कमेटी द्वारा बनाया गया था। भारत के संविधान को बनाने में दो साल, 11 महीने और 17 दिन का समय लगा था। भारत के संविधान को बनाने में उन सभी 300 लोगों की समान भागीदारी थी जो उस कमेटी का हिस्सा थे। भारत के संविधान को लिखा था प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने जो की एक कैलिग्राफी आर्टिस्ट थे। संविधान लिखें लिये प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने कोई भी मेहनताना नहीं लिया बल्कि उन्होंने संविधान लिखने के बदले में अपनी एक शर्त पंडित जवाहर लाल नेहरू के सामने रखी थी की संविधान के प्रत्येक पेज पर उनके खानदान का नाम लिखा जाना होगा। और उनकी ये बात मान ली गई थी। भारत संविधान के निर्माण कमेटी अध्यक्ष भीमराव अंबेडकर थे।

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(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं और हमारी इंटरनेट पर की गई खोजों पर आधारित हैं. ABNPost.com इनकी पूर्ण रूप से पुष्टि नहीं करता है। इन करने से पहले कृपया दूसरे स्त्रोतों के साथ मिलान करके दुरुस्त जरूर करें।)

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