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Chhath Puja : छठ पूजा कैसे की जाती है, छठ पूजा की सम्पूर्ण जानकारी, महत्व और विधि

क्यों मनाया जाता है Chhath Puja , क्या है इसका इतिहास ? Why is Chhath Puja celebrated, what is its history.

Chhath Puja -: दोस्तों छठ पर्व, छठ या षष्‍ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। छठ पूजा के बारे में कहा जाता है यह पर्व बिहारीयों का सबसे बड़ा पर्व है और ये उनकी संस्कृति है।

  • छठ पूजा पर्व पुरे बिहार मे बड़े धुम धाम से मनाया जाता है।
  • छठ पूजा का पर्व एक मात्र ऐसा पर्व है
  • जो बिहार या पूरे भारत में वैदिक काल से चला आ रहा है।
  • छठ का त्यौहार अब बिहार कि संस्कृति बन चुका हैं।
  • अब फ़िलहाल की बात की जाये तो
  • यह त्यौहार विश्व भर में प्रसिद्ध हो चूका है।
  • आपको बता दें की छठ में किसी भी प्रकार की मूर्ति पूजा नहीं की जाती।
  • ये त्यौहार पूर्ण रूप से सूर्य, उषा, प्रकृति,जल, वायु
  • और उनकी बहन छठी म‌इया को समर्पित है।

माना जाता है कि इस खीर और रोटी के प्रसाद का बड़ा महत्व है। साथ ही यह प्रसाद खाने के बाद जो व्रत करते है वे जमीन को ही अपना आसान बनाते हैं या लकड़ी की चौकी को।

पहले यह व्रत बिहार के गंगा के घाट से शुरू होता था। आज पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

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कैसे शुरू हुआ छठ पूजा पर्व (How Chhath Puja festival started)

छठ पर्व कैसे शुरू हुआ इसके पीछे बहुत सी ऐतिहासिक कहानियां समाज में प्रचलित हैं। चलिए आपको बताते है की कौन कौन सी कथाये छठ पूजा को लेकर सुनाई जाती है।

राजा प्रियवंद की कहानी (Story of king Priyavand)

पुराण में छठ पूजा के पीछे की कहानी राजा प्रियंवद को लेकर बताई गयी है। कहते हैं राजा प्रियंवद को कोई संतान नहीं थी तब महर्षि कश्यप ने पुत्र की प्राप्ति के लिए यज्ञ कराकर प्रियंवद की पत्नी मालिनी को आहुति के लिए बनाई गई खीर दी। उस खीर को खाने के बाद उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई लेकिन वो पुत्र मरा हुआ पैदा हुआ।

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प्रियंवद पुत्र को लेकर श्मशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे। उसी वक्त भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं और उन्होंने राजा से कहा कि क्योंकि वो सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं, इसी कारण वो षष्ठी कहलातीं हैं। उन्होंने राजा को उनकी पूजा करने और दूसरों को भी पूजा के लिए प्रेरित करने को कहा।

राजा प्रियंवद ने पुत्र इच्छा के कारण देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। कहते हैं ये पूजा कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को हुई थी और तभी से छठ पूजा होती है।

छठ पूजा को लेकर श्रीराम सीता से जुडी कहानी (Story related to Shri Ram Sita regarding Chhath Puja)

पौराणिक कथाओं के मुताबिक जब राम-सीता 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापस लौटे थे तो रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए उन्होंने ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूय यज्ञ करने का फैसला लिया। उस यज्ञ में पूजा के लिए उन्होंने मुग्दल ऋषि को आमंत्रित किया।

मुग्दल ऋषि ने मां सीता पर गंगा जल छिड़क कर पवित्र किया और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने का आदेश दिया। जिसे सीता जी ने मुग्दल ऋषि के आश्रम में रहकर छह दिनों तक सूर्यदेव भगवान की पूजा की थी। बस तभी से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा का पर्व मनाया जाने लगा।

छठ पूजा को लेकर महाभारत से जुडी कहानी (Story related to Mahabharata about Chhath Puja)

एक पौराणिक मान्यता के अनुसार छठ पूजा पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। इसकी शुरुआत सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य की पूजा करके की थी। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे और वो रोज घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बने। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही परंपरा प्रचलित है।

द्रोपदी में भी रखा था छठ व्रत (Chhath fast was also kept in Draupadi)

छठ पूजा के बारे में एक कथा और भी है। इस किवदंती के मुताबिक, जब पांडव सारा राजपाठ जुए में हार गए, तब द्रोपदी ने छठ व्रत रखा था। इस व्रत से उनकी मनोकामना पूरी हुई थी और पांडवों को सब कुछ वापस मिल गया। लोक परंपरा के अनुसार, सूर्य देव और छठी मईया का संबंध भाई-बहन का है। इसलिए छठ पूजा के मौके पर सूर्य की आराधना फलदायी मानी गई।

तो दोस्तों इस पोस्ट में आपने जाना छठ का पर्व क्यों मनाया जाता है। हमारी ये छोटी सी कोशिश आपको कैसी लगी हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताना। आपको अगर ये पोस्ट पसंद आयी हो तो इसको अपने परिवार और मित्रो को सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर अवश्य करें।

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Manoj Kumar

हरियाणा का रहने वाला हूँ और शुरू से ही लिखने का बड़ा शौख रहा है। नई नई चीजों के बारे में जानकारी लेना और इंटरनेट का कीड़ा बनना काफी पसंद है।

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